लोमड़ी की साजिश

लोमड़ी की साजिश

लोमड़ी की साजिश एक लोमड़ी बहुत भूखा था।

कई दिन से ठीक भोजन न मिलने के कारण वह कमजोर हो गया था।

इतनी ताकत भी न था कि स्‍वयं शिकार करके खा सके।

थोड़ी देर में उसने एक शेर को आते देखा।

शेर ने एक भैंसे का शिकार किया था।

वह खा-पीकर अपनी गुफा की ओर लौट रहा था।

लोमड़ी भूख और कमजोरी के कारण शेर को देखकर काँपने लगा।

जैसे ही शेर निकट आया, लोमड़ी पेट के बल लेट गया।

शेर ने लोमड़ी को इस तरह लेटा देखा तो उसे हँसी आई और दया भी।

शेर ने पूछा—“तुझे क्‍या कष्‍ट है जो इस तरह पेट के सहारे लेटा है?”

“हुजूर ! मैं कई दिन से भूखा हूँ।

यदि आप आज्ञा दें तो मैं आपकी सेवा करना चाहता हूँ।“

“ठीक है, चल मेरे साथ।“ शेर ने कहा।

लोमड़ी शेर के साथ चल दिया।

गुफा में जो कुछ मांस पड़ा था, उसे देकर शेर ने कहा—“आज इतने से ही काम चला।

कल से तेरे हिस्‍से का भी लेकर आऊँगा।“

अगले दिन से शेर उसके लिए भोजन लाने लगा।

घर बैठे भोजन पाकर लोमड़ी बहुत खुश हुआ।

कुछ ही दिनों में मुफ्त का भोजन करके वह खूब मोटा-तगड़ा हो गया। उसमें शक्ति भी आ गई।

शेर की गुफा में रहने और शेर की कृपा प्राप्‍त करने के कारण धीरे-धीरे लोमड़ी का दिमाग भी फिरने लगा।

लोमड़ी जंगल में इस शान से घूमता जैसे उसे कुछ विशेष अधिकार मिल गए हों।

वह अपनी लोमड़ी जाति को नफरत की नजर से देखता।

तेंदुओ और भेडि़यों पर इस तरह रौब जामात जैसे उनका अफसर हो।

भालू, लोमड़ी, खरगोश आदि को तो वह मूर्ख समझने लगा था।

उसका घमंड देखकर जंगल के जानवर उससे चिढ़ने लगे।

वे चाहते तो बड़ी आसानी से लोमड़ी का घमंड मिटा सकते थे।

परंतु वे जानबूझकर शेर को नाराज नहीं करना चाहते थे।

उधर लोमड़ी ने सोचा कि अब मैं भी शेर की तरह ताकतवाला हो गया हूँ।

मैं किसीसे कम नहीं हूँ।

आखिर एक दिन उसका घमंड इतना बढ़ गया कि वह हाथी का शिकार करने की बात सोचने लगा।

उसने शेर से कहा—“हुजूर ! आपकी गुफा में रहकर भोजन करते-करते अब काफी दिन हो गए हैं।

मैं चाहता हूँ कि अब आप आराम करें और मैं शिकार करके लाऊँ। मैं हाथी का शिकार करना चाहता हूँ।“

शेर ने कहा—“अरे मूर्ख! कहॉं हाथी जैसा ताकतवाला विशाल जानवर और कहॉं तू लोमड़ी ।

शिकार करना तेरा काम नहीं है। जिसका जो काम है, उसे वही करना चाहिए।

मैं तुझे हाथी मारकर दूँगा। मेरा कहना मान जा।“

शेर जंगल में चला गया। इधर लोमड़ी गुफा से बाहर निकला।

उसे तो अपनी ताकत पर बड़ा घमंड हो गया था।

उसने एक हाथी को जाते देखा। बस, उसके पीछे लग गया।

जंगल के जानवरों ने लोमड़ी को इस तरह हाथी का पीछा करते देखा तो कुछ समझ न पाए।

लोमड़ी ने बड़ी शान से उन्‍हें इशारे से बताया कि वह उसका शिकार करेगा।

आखिर लोमड़ी आगे आकर एक ऊँची चट्टान पर चढ गया।

जैसे ही हाथी वहॉं से निकला कि लोमड़ी उसकी गरदन पर हमला करने के लिए कूदा।

लेकिन वह हाथी के पैरों के पास जा गिरा। हाथी ने तुरंत अपना पैर उसपर रख दिया।

लोमड़ी वहीं चकनाचूर हो गया।

शेर ने दूर से यह दृश्‍य देखा। वह उसके पास आया।

जंगल के जानवरों को उसने लोमड़ी के घमंउ का फल दिखाकर कहा—“अपनी ताकत को जाने बिना,

अपने से ज्‍यादा बलवान से भिड़ जानेवाले का यही हाल होता है।

जो अपनी शक्ति और बल को जानकर, शक्ति के भीतर काम करता हॅ, वही सफलता प्राप्‍त करता है।“

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