मीठी बोली रस भरी

मीठी बोली रस भरी

मीठी बोली रस भरी एक किसान ने एक बछड़ा खरीदा। बछड़ा सुंदर था।

किसान ने उसे खूब खिलाया-पिलाया। कुछ ही समय में वह बछड़ा बैल बन गया।

उसका डीलडौल, गोल सींग आदि देखकर सभी लोग किसान से कहते—“बड़े भाग्‍यशाली हो!

इतना सुंदर बैल तो किसीके पास नहीं है।“

किसान में यों तो सभी बातें अच्‍छी थीं, पर वह बात-बात में गाली बहुत बकता था।

बैल को यह बात बहुत बुरी लगती थी। किसान की गालियॉं लोग सुनते थे।

फिर बैल कैसे बचा रहता । वह जब भी बैल को खोलता तो कहता—“चल रे डूँडे, खा-खाकर मोटा हो रहा है।,

धूर्त, नीच, पापी…चल खेत पर काम कर।“

बैल अपने काम में कोई कमी न रखता। फिर व किसान की गालियॉं क्‍यों खाए?

एक दिन उसने किसान से कहा भी—“तुम क्‍यों इस तरह गाली बकते हो। मनुष्‍य को अच्‍छे वचन बोलने चाहिए।“

किसान बिगड़ गया। उसने बैल की पीठ पर दो-तीन डंडे जमाकर ढेर सी गालियॉं सुना दीं। बेचारा बैल चुप हो गया।

एक दिन किसान अपना बैल लिये खेत से लौट रहा था। रास्‍ते में गॉंव का ठाकुर मिल गया।

“बड़ा अच्‍छा बैल है।“ ठाकुर ने कहा।

“हॉं, ठाकुर! गॉंव के किसीके पास ऐसा बैल नही है। यह सौ छकड़ों को एक साथ खींच सकता है।“

किसान ने शान में आकर कहा।

“अच्‍छा, ऐसी बात है! तो एक हजार रुपए की शर्त रही।

कल इस बेल से सौ छकड़े एक साथ खिंचवाकर दिखा दो।“ ठाकुर ने कहा।

“शर्त मंजूर है!” किसान उसी अभिमान से बोला।अगले दिन शर्त की तैयारी हुई।

सौ छकड़ो में बालू, मिट्टी और पत्‍थर भरा गया और सबको एक के पीछे एक बॉंध दिया गया।

अब किसान बैल को लेकर आया। बैल ने ठाकुर और किसान की बातें सुन ली थीं।

किसान ने बैल को सबसे आगे के छकड़े में जोतते हुए कहा—“चल रे डूँडे, बहुत खाया है तूने…” और गाली बकते हुए रस्‍सी बॉंधने लगा।

बैल ने सोचा—आज इस किसान को सबक सिखाना चाहिए। उधर ठाकुर ने आवाज लगाई—“गाड़ी हॉंको।“

इधर बैल ने चारों पैर जमा लिये। किसान ने बहुत कोशिश की, पर बैल न हिला।

ठाकुर ने तुरंत किसान से एक हजार रुपए वसूल कर लिये।

किसान उदास होकर लौट आया। रात को वह चुपचाप पड़ा था। नींद नहीं आ रही थी।

बैल ने कहा—“तुम मुझे गाली क्‍यों देते हो! मेरे सींग है, फिर भी मुझे डूँडा कहते हो।

मैं तुम्‍हारी सेवा करता हूँ और तुम मुझे गाली देते हो।“

“चुप रह नीच! तेरी वजह से मुझे एक हजार रुपयों का नुकसान उठाना पड़ा है।“ किसान बोला।

“अगर मेरी बात मानो तौ मैं एक हजार का लाभ भी करा सकता हूँ।“ बैल ने कहा।

“कैसे?”“तुम गाली देना छोड़ दो। सबसे अच्‍छे वचन बोलो।“

“ठीक है। मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि अब कभी किसीसे कटु वचन नहीं बोलूँगा।“

“तो जाओ, ठाकुर से इस बार दो हजार की शर्त लगा लो।“

अगले दिन दो हजार की शर्त का आयोजन हुआ। गॉंव के लोग आज भी भरी संख्‍या में उपस्थित थे।

बैल को एक सौ छकड़ों के आगे जोता गया। किसान ने हांक लगाई और बैल उन छकड़ों को न खींचने लगा।

लोग हैरान रह गए । जो बैल कल छकड़ों को खींचकर खड़ा रह गया था, आज उन सौ छकड़ों को आसानी से खींच ले गया।

किसान ने दो हजार की शर्त जीत ली। ठाकुर ने कहा—“मैं तो जानता था कि यह बैल सुंदर और ताकतवर है।

लेकिन कल बज यह शर्त हार गया तो मुझे भी आश्‍चर्य हुआ था। भला आज क्‍या बात हुई?”

किसान ने बताया—“कुछ नहीं, ठाकुर! यह मीठी बोली रस भरी का प्रभाव है। कड़वे वचन मनुष्‍य तो क्‍या, जानवर को भी नाराज कर देते है।

मीठे वचन से असंभव भी संभव हो जाता है।“

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